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आधुनिक हिंदी गद्य का विकास

निबंध, नाटक और आलोचना जैसी विधाओं में हिंदी गद्य ने नवजागरण के दौर में किस तरह आकार लिया — विस्तृत विवेचन।

Nह
Navjagran हिंदी टीम
31 जुलाई 2026, 3:59 पूर्वाह्न
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हिंदी नवजागरण से पहले हिंदी साहित्य मुख्यतः पद्य (कविता) केंद्रित था। भारतेंदु युग और द्विवेदी युग के दौरान गद्य विधाओं — निबंध, नाटक, आलोचना और बाद में उपन्यास — का व्यवस्थित विकास हुआ।

प्रमुख गद्य विधाएँ

  • निबंध — बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र जैसे लेखकों द्वारा समृद्ध।
  • नाटक — भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा हिंदी रंगमंच को नई दिशा।
  • आलोचना — द्विवेदी युग में वैज्ञानिक व तार्किक आलोचना-पद्धति का विकास।

इस गद्य-विकास ने आगे चलकर प्रेमचंद जैसे उपन्यासकारों के लिए भाषा और शैली का आधार तैयार किया, जिन्होंने हिंदी उपन्यास को नई ऊँचाई दी।

Last Updated: 31 जुलाई 2026, 3:16 अपराह्न IST
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Navjagran की हिंदी संपादकीय टीम — हिंदी नवजागरण और हिंदी साहित्य पर शोध-आधारित सामग्री तैयार करती है।

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