द्विवेदी युग और सरस्वती पत्रिका का योगदान
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस तरह हिंदी भाषा के मानकीकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की नींव रखी — द्विवेदी युग का विस्तृत परिचय।
द्विवेदी युग (लगभग 1900-1918) हिंदी नवजागरण का वह चरण है, जिसमें भाषा की शुद्धता, व्याकरणिक मानकीकरण और गद्य की परिष्कृति पर विशेष बल दिया गया। इस युग का नाम महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर पड़ा।
सरस्वती पत्रिका की भूमिका
महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादन में प्रकाशित ‘सरस्वती’ पत्रिका ने हिंदी गद्य को एक सुव्यवस्थित, तार्किक और वैज्ञानिक स्वरूप देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। इस पत्रिका ने नए लेखकों को मंच दिया और भाषा-मानकीकरण के लिए दिशा-निर्देश स्थापित किए।
योगदान
- खड़ी बोली को साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करना।
- निबंध और आलोचना विधा को समृद्ध बनाना।
- वैज्ञानिक व तर्कसंगत लेखन-शैली को बढ़ावा देना।
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