हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का आंदोलन
हिंदी नवजागरण से उपजी वह वैचारिक मांग, जिसने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने के आंदोलन को दिशा दी।
हिंदी नवजागरण के दौर में उठी एक महत्वपूर्ण मांग थी – हिंदी को एक राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करना। भारतेंदु युग और द्विवेदी युग के लेखकों ने भाषा को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देखा।
पृष्ठभूमि
19वीं सदी के उत्तरार्ध में हिंदी-उर्दू विवाद, देवनागरी लिपि की मान्यता के प्रश्न, और शिक्षा-नीति से जुड़े विषयों ने भाषा को राजनीतिक चेतना से जोड़ दिया। राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’ जैसे व्यक्तित्व इस बहस के केंद्र में रहे।
आगे का प्रभाव
यह वैचारिक नींव आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग, और स्वतंत्र भारत में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिए जाने की प्रक्रिया तक जुड़ती चली गई।
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Navjagran की हिंदी संपादकीय टीम — हिंदी नवजागरण और हिंदी साहित्य पर शोध-आधारित सामग्री तैयार करती है।
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