हिंदी नवजागरण: परिभाषा, अर्थ और उत्पत्ति
हिंदी नवजागरण क्या है, यह कब और कैसे शुरू हुआ, और इसे भारतीय पुनर्जागरण की व्यापक धारा से क्यों जोड़ा जाता है — विस्तार से जानें।
हिंदी नवजागरण (Hindi Renaissance) शब्द का प्रयोग उस ऐतिहासिक दौर के लिए किया जाता है, जब 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हिंदी भाषी क्षेत्र में भाषा, साहित्य, पत्रकारिता और समाज-सुधार को लेकर व्यापक वैचारिक जागृति आई। यह भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) की उस बड़ी धारा का हिस्सा माना जाता है, जिसकी शुरुआत बंगाल में राजा राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे सुधारकों के प्रयासों से हुई थी।
हिंदी क्षेत्र में इस जागृति का नेतृत्व भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) और उनके समकालीन लेखकों-पत्रकारों ने किया। इसे प्रायः ‘भारतेंदु युग’ के नाम से जाना जाता है, जो हिंदी नवजागरण का प्रारंभिक और सबसे प्रभावशाली चरण था।
नवजागरण शब्द का अर्थ
‘नवजागरण’ का शाब्दिक अर्थ है ‘नई जागृति’ या ‘नया उदय’। यह शब्द केवल साहित्यिक बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन की एक व्यापक प्रक्रिया को दर्शाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
19वीं सदी में ब्रिटिश शासन, पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार, प्रिंटिंग प्रेस का आगमन और सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों (जैसे आर्य समाज, ब्रह्म समाज) ने मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जिसमें हिंदी बुद्धिजीवियों ने भाषा और समाज दोनों को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।
| आगे यह भी पढ़े |
Navjagran हिंदी टीम
संपादकीय टीम
Navjagran की हिंदी संपादकीय टीम — हिंदी नवजागरण और हिंदी साहित्य पर शोध-आधारित सामग्री तैयार करती है।
Comments
Join the discussion
Acha hai