भारतेंदु युग: हिंदी नवजागरण की नींव
भारतेंदु हरिश्चंद्र के नेतृत्व में हिंदी गद्य, नाटक और पत्रकारिता की शुरुआत कैसे हुई — भारतेंदु युग की प्रमुख विशेषताएँ।
भारतेंदु युग (लगभग 1868-1900) को हिंदी नवजागरण का प्रारंभिक और आधारभूत चरण माना जाता है। इस युग का नाम भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाम पर पड़ा, जिन्हें ‘आधुनिक हिंदी गद्य का जनक’ कहा जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ
- हिंदी नाटक, निबंध और पत्रकारिता की व्यवस्थित शुरुआत।
- सामाजिक कुरीतियों — जैसे अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव — के विरुद्ध खुला लेखन।
- ‘कविवचनसुधा’ और ‘हरिश्चंद्र मैगज़ीन’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से जनजागरण।
- राष्ट्रीय चेतना और स्वदेशी भावना को साहित्य में स्थान।
अन्य प्रमुख लेखक
भारतेंदु के अतिरिक्त प्रताप नारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट और बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ जैसे लेखकों ने भी इस दौर में हिंदी गद्य और पत्रकारिता को समृद्ध किया। इस मंडली को सामूहिक रूप से ‘भारतेंदु मंडल’ कहा जाता है।
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