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छायावाद और हिंदी नवजागरण का संबंध

क्या छायावाद हिंदी नवजागरण की वैचारिक विरासत का ही काव्यात्मक विस्तार है? जयशंकर प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी वर्मा के योगदान पर एक नज़र।

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Navjagran हिंदी टीम
31 जुलाई 2026, 3:59 पूर्वाह्न
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छायावाद (लगभग 1918-1938) हिंदी कविता का वह दौर है, जिसे प्रायः हिंदी नवजागरण की वैचारिक विरासत और द्विवेदी युग की परिष्कृत भाषा-चेतना के आगे के काव्यात्मक विकास के रूप में देखा जाता है।

प्रमुख कवि

जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा — इन चार प्रमुख कवियों को छायावाद के स्तंभ कवि माना जाता है। इन्होंने भावनात्मक गहराई, कल्पनाशीलता और व्यक्तिवादी अभिव्यक्ति को हिंदी कविता में प्रमुख स्थान दिलाया।

नवजागरण से संबंध

जहाँ भारतेंदु और द्विवेदी युग ने गद्य, पत्रकारिता और सामाजिक सुधार पर बल दिया, वहीं छायावाद ने उसी वैचारिक जागृति को काव्य के माध्यम से आगे बढ़ाया — प्रकृति, सौंदर्य और मानवीय संवेदना के नए आयाम खोलते हुए।

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Last Updated: 31 जुलाई 2026, 3:17 अपराह्न IST
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Navjagran की हिंदी संपादकीय टीम — हिंदी नवजागरण और हिंदी साहित्य पर शोध-आधारित सामग्री तैयार करती है।

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  • दय
    द्विवेदी युग और सरस्वती पत्रिका का योगदान – Hindi Navjagran 31 जुलाई 2026

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